शनिवार, 5 सितंबर 2026
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मोबाइल की कीमतों में भारी उछाल: रैम-मेमोरी चिप संकट बना असली वजह

मोबाइल की कीमतों में भारी उछाल: रैम-मेमोरी चिप संकट बना असली वजह

देश-दुनिया में मोबाइल फोन और LED टीवी की कीमतों में हुई अचानक बढ़ोतरी को लेकर उपभोक्ताओं में चिंता का माहौल है। जानकारी के अनुसार इसके पीछे मुख्य कारण कोई एक कंपनी की नीति नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप (RAM, DRAM, NAND) की भारी किल्लत है।

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देश-दुनिया में मोबाइल फोन और LED टीवी की कीमतों में हुई अचानक बढ़ोतरी को लेकर उपभोक्ताओं में चिंता का माहौल है। जानकारी के अनुसार इसके पीछे मुख्य कारण कोई एक कंपनी की नीति नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप (RAM, DRAM, NAND) की भारी किल्लत है। रिपोर्टों के अनुसार कीमतों में हो रही लगातार बढ़ोतरी के केंद्र में मेमोरी पार्ट्स का महंगा होना है, क्योंकि फोन में इस्तेमाल होने वाले DRAM और NAND जैसे कंपोनेंट्स की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसकी सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटरों की भारी मेमोरी मांग बताई जा रही है — एआई मॉडल्स और डेटा सेंटर्स को प्रोसेस करने के लिए भारी-भरकम हाई-एंड और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की जरूरत होती है, जिसने डिमांड और सप्लाई के बीच एक खाई पैदा कर दी है। जानकारों का तो यहाँ तक कहना हैं कि RAM की कीमतों में भारी उछाल ने सिर्फ फोन-लैपटॉप ही नहीं, बल्कि सर्वर और आम कारोबार की लागत भी बढ़ा दी है। बजट सेगमेंट पर मार सबसे ज्यादा पड़ी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 400 डॉलर से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स की कुल निर्माण लागत का करीब 60% हिस्सा अब सिर्फ मेमोरी पर खर्च हो रहा है, जबकि 8,500 रुपये से कम कीमत वाले फोन्स में यह हिस्सा 64% से भी ज्यादा पहुंच चुका है। कुछ मामलों में उछाल बेहद तीखा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार Counterpoint Research की ट्रैकिंग में मेमोरी की कीमतें एक तिमाही में 80-90% तक बढ़ी हैं, जिसे "अभूतपूर्व और रिकॉर्ड-तोड़" उछाल बताया गया है। इसका सीधा असर हैंडसेट कीमतों पर दिखा — एक भारतीय ब्रांड के मामले में 8GB रैम और 128GB स्टोरेज वाला मॉडल जो करीब 40 हजार रुपये में शुरू हुआ था, अब बढ़कर करीब 50 हजार रुपये तक पहुंच चुका है। कीमतों की इस मार का सीधा असर बिक्री पर पड़ा है। भारतीय बाजार को लेकर एक रिपोर्ट में कहा गया कि इस मंदी की सबसे बड़ी वजह मेमोरी चिप्स की रिकॉर्ड तोड़ महंगाई है, जिसके चलते कंपनियों को मजबूरन फोन महंगे करने पड़े और औसत कीमत में करीब 15% का इजाफा हो चुका है। इसका सबसे बुरा असर सस्ते फोन खरीदने वालों पर पड़ा — 15,000 रुपये से कम कीमत वाले बजट सेगमेंट की बिक्री में 45% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार तो हालात और गंभीर हैं, जहां 8,500 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स के शिपमेंट में 74.3% तक की भारी गिरावट आई है। बजट और मिड-रेंज सेगमेंट में 20% से 60% तक की बढ़ोतरी की खबरें मुख्यतः मेमोरी चिप की वैश्विक किल्लत से जुड़ी हैं, जिसे AI डेटा सेंटरों की भारी मांग ने और गंभीर बना दिया है। कंपनियां लागत सीधे ग्राहकों पर डाल रही हैं, जिससे बजट सेगमेंट की बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई है, जबकि प्रीमियम सेगमेंट अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार यह संकट 2027 तक बना रह सकता है।
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